शाबाश ! देश सेवा के जज्बे को सलाम

गाजीपुर (उत्तर प्रदेश),14 मार्च 2018। सच्ची लगन, कड़ी मेहनत और सार्थक प्रयास से ही अपने लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है, इसे साबित किया है जिले के ढढ़नी गांव की बेटी अर्पणा राय ने।बहुराष्ट्रीय अमेेरिकी कम्पनी की

मोटी सेलरी पैकेज तथा ढेरों सुविधाएं भी उन्हें रोक न सकीं।देश के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना के साथ वे बहुराष्ट्रीय कंपनी के बड़े सेलरी पैकेज की नौकरी को छोड़कर भारतीय सेना तक जा पहुंची। चेन्नई स्थित सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण के उपरान्त 23 वर्षिया अर्पणा राय को लेफ्टिनेंट नियुक्त किया गया है।

अर्पणा राय ने गत दस मार्च को पासिंग आउट परेड में भाग लिया। अपनी लगन और सार्थक प्रयास से अपने लक्ष्य का भेदन कर उन्होंने जिले का नाम रोशन कर महिलाओं के लिए एक मिशाल पेश किया है।

वाराणसी में अपना कारोबार करने वाले अशोक राय तथा उनकी पत्नी चिंतामणी राय अपनी पुत्री की इस सफलता से फूले नहीं समा रहे हैं। आरम्भ से ही मेधावी रही अर्पणा ने इंटरमीडियट परीक्षा में स्कूल टॉप करने के बाद एनआईटी श्रीनगर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर 2016 में इंजीनियरिंग की स्नातक बनीं। एनआईटी से बीटेक की डिग्री प्राप्त करने के बाद 2016 में चेन्नई में ही एक अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्य करना शुरू किया फिर भी अर्पणा का सेना में जाने का जुनून बरकरार रहा। सेना में पहुचने की तैयारी के दौरान 2017 में कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा देकर मेरिट में दूसरा स्थान प्राप्त किया।अप्रैल 2017 में सेना में जाने का लक्ष्य तब पूूूर्ण हुआ जब ओटीए चेन्नई में उनको प्रशिक्षण हेेेतु प्रवेश मिल गया।

चेन्नई में प्रशिक्षण

पूरा कर दस मार्च को पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया था। बेटी के लेफ्टिनेंट बनने की सफलता पर उनके माता पिता काफी खुश है। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों मे रहकर हमारी बेटी ने जो मुकाम हासिल किया है वो मुझ जैसे मध्यमवर्गीय सामान्यजन के लिए बड़ी बात है और हम अपनी बेटी से गौरवान्वित हैं। हमारी इच्छा है कि वह महिलाओं व देश के लिए प्रेरणा स्रोत बने।
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लोकार्पण ! प्रदेश का सबसे बड़ा सोलर प्लांट हुआ  लोकार्पित – मोदी-मैक्रों ने संयुक्त रूप किया लोकार्पण

मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश),12 मार्च 2018।जिले के दादर कला गांव में फ्रांस के सहयोग से बने 75 मेगावाट के सोलर एनर्जी प्लांट का लोकार्पण आज सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने संयुक्त रूप से किया। समारोह स्थल पर लगे शिलापट्ट का दोनों लोगों ने एक साथ अनावरण किया। इसके साथ ही यहां से बिजली का निर्माण भी शुरू हो गया।
उल्लेखनीय है कि फ्रांसीसी कंपनी के सहयोग से 382 एकड़ में फैले इस सोलर प्लांट में 318650 प्लेट्स लगी हैं और प्रति सोलर प्लेट 315 वाट बिजली तैयार होगी। डेढ़ वर्ष में तैयार हुए सोलर प्लांट के निर्माण में 650 करोड़ रुपए खर्च हुए।
प्रोजेक्ट संचालक प्रकाश कुमार के अनुसार अत्याधुनिक ढंग से निर्मित इस प्लांट में सूर्य के प्रकाश के साथ ही एनर्जी उत्पादित होने लगेगी और प्रकाश समाप्त होते ही प्लांट आटोमेटिक रूप से स्वयं बंद हो जाएगा। इस प्लांट से 5 लाख यूनिट बिजली प्रतिदिन उत्पादित होगी।
इससे पूर्व जनपद के छानबे ब्लाक अन्तर्गत दादर कलां गांव स्थित हेलीपैड पर उतरते ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों को विंध्य धाम की प्रसिद्ध चुनरी पहनाकर स्वागत किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल सहित जनप्रतिनिधिगण भी उपस्थित रहे।

आश्चर्य ! 95% इंटरनेट से अनभिज्ञ हैं आम लोग

दिल्ली । 10 मार्च 2018 । आज जहां सारा विश्व इंटरनेट का दिवाना है और इसके माध्यम से नयी तकनीकी जानकारियां लोगों तक पहुंच रही हैं, फिर भी आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मात्र पांच प्रतिशत इंटरनेट का ही उपयोग आमजनों द्वारा किया जाता है। कहीं आप भी तो उन्हीं मे से एक तो नहीं ?

आइये, जानते हैं उसके बारे में,

संचार क्रांति के माध्यम से इंटरनेट आज जन सामान्य की भाषा बन चुका है। इंटरनेट के माध्यम से आज प्रतिदिन करोड़ों लोग बगैर किसी झंझट के अपना कार्य पूर्ण करते हैं। यहां तक कि यह आर्टिकल भी आप इंटरनेट के माध्यम से पढ़ रहे हैं ।सामान्यतः हम सोचते हैं कि वास्तव में इंटरनेट की दुनिया काफी बड़ी है, जहां से गुगल, याहू, बिंग आदि विभिन्न सर्च इंजनों के माध्यम से हर जानकारी पलक झपकते ही प्राप्त कर लेते हैं। इस संबंध में आपको बताना चाहते हैं कि विभिन्न सर्च इंजनों के माध्यम से जो जानकारी हमें प्राप्त होती हैं वह पूरे इंटरनेट का मात्र 5 से 10 प्रतिशत ही होता है । बाकी 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा ऐसा है जिसे हम सामान्य ब्राउज़र से न तो खोल सकते हैं ना ही इंटरनेट पर देख सकते हैं ।इसका उपयोग करने के लिए TOR ब्राउज़र

(“द ओनियन रूटर”) का उपयोग करना होगा।

इंटरनेट का विचार 1960 में यूएस के कैलिफोर्निया में विकसित होना शुरू हुआ

। सर्वप्रथम इस संबंध में लियोनार्ड क्लिनराक ( Leonard kleinrkck ) ने अपने पहले लेख ” lnformation flow in large communication nets ” द्वारा 31मई 1961 को अपने विचार प्रकाशित कियेे। उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 1962 में IPTO ( Information processing technology office ) के निदेशक जेसीआर

लिकलिड्र ( JCR Licklidr) ने कम्प्यूटर के आंतरिक नेटवर्क के विचार को लोगों तक पहुंचाया। उपरोक्त दोनों महानुभावों के विचार से प्रेरित होकर रावर्ट टॉयलर ने नेटवर्क तैयार करने में उनकी मदद की। इसी प्रकार अनेकों प्रयासों के बाद जो प्रथम नेटवर्क तैयार हुआ वह यू. एस. की मिलिट्री द्वारा अपने विशेष कार्यों हेतु वर्ष 1969 में प्रयोग किया गया था। उस समय इसे ARPANET ( ऐडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एडमिनिस्ट्रेशन नेटवर्क ) का नाम दिया गया था। फिर नेशनल साइंस फाउंडेशन द्वारा इसका नाम बदलकर NSFNET ( नेशनल साइंस फाउंडेशन नेटवर्क )किया गया। तदुपरांत 1980 में इसे सामान्य जनों के उपयोगार्थ चालू किया गया।
आज वर्तमान समय में सेवाओं के अनुसार इंटरनेट को मुख्यतः तीन भागों में वर्णित किया गया है –
1.सरफेस वेब
2. डीप वेब
3. डार्क वेब

1.सरफेस वेब – सरफेस वेेेब इंटरनेट का वह हिस्सा होता है जिसमें हम गुगल, याहू,बिंंग आदि सर्च इंजनों के माध्यम से उपयोग करते हैं । विश्व में सर्वाधिक इसी वेब का प्रयोग होता है। सरफेस वेब में सर्च इंजन की सहायता से हम किसी भी वेबसाइट को एक लिमिट में रहकर देख सकते हैं। इसमें हम वही देख सकते हैं जो हमें उसका एडमिन दिखाना चाहता है। इसमें हम चाह कर भी एडमिन एरिया को न तो खोल सकते हैं न ही उसका उपयोग कर सकते हैं।
2. डीप वेब – डीप वेब इंटरनेट का वह हिस्सा होता है जिससे आम लोग अनभिज्ञ हैं। इसे इनविजीवल वेब के नाम से जाना जाता है।
इसे हम इंटरनेट पर सर्च करके नहीं पा सकते हैं, क्योंकि यह “नो इन्डेक्स” वेबसाइट होती है। सामान्यतः हम अपने फोटो,विडियो, फाइल आदि क्लाउड स्टोरेज में सेब करते हैं। इसके लिए कई वेबसाइट भी मौजूद हैं। क्लाउड स्टोरेज की जितनी भी वेबसाइट होती हैं वे डीप वेब के अंतर्गत आती हैं। वैसे डीप वेब का वास्तविक आकार मापना असंभव है , फिर भी विशेषज्ञों के अनुसार इसका आकार सरफेस वेब से लगभग 500 गुना बड़ा माना जाता है। इन्हें हम तभी प्रयोग कर सकते हैं जब हमारे पास उनका फिक्स URL तथा उसका पासवर्ड हो अर्थात इस प्रकार की वेबसाइट पर गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखी जाती हैं व गोपनीय डाटा एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जाता है या फिर डेटाबेस बनाकर सुरक्षित रखा जाता है। इसका उपयोग अधिकांश सरकारी दस्तावेज, वैज्ञानिक शोध आदि को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है । इन वेबसाइटों को वही लोग संचालित कर सकते हैं जिन्हें इसको संचालित करने के लिए मान्य किया गया हो और उनके पास उनका पासवर्ड हो ।
3. डार्क वेब – डार्क वेब इंटरनेट का गैरकानूनी क्षेत्र होता है ,जहां जाने कि हम आपको मनाही करते हैं। यहां उसकी जानकारी सिर्फ ज्ञान के लिए दी जा रही है। यह इंटरनेट का अवैध क्षेत्र कहलाता है इसलिए इस क्षेत्र पर जाना और उसका उपयोग करना पूरी तरह अवैध है।
इस वेब का प्रयोग करने के लिए स्पेशल इंटरनेट ब्राउज़र की आवश्यकता होती है जिसे TOR ब्राउज़र (“द ओनियन रूटर”) कहते हैं। इसके द्वारा अवैध ढंग से नशीली दवाओं के व्यापार, फ्राड के तरीके, आतंकियों को धन देेेने, नकली करेंसी, वायरस, हैकिंग, पाइरेटेड साफ्टवेयर, शूटर हायर करनेे, कारडिंग सम्बन्धित अवैध कार्य किए जाते हैं । इसमें किसी देश की भी करेंसी का प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि सारा लेनदेन बिटकॉइन के माध्यम से संचालित होता है।
**** इंटर नेट के मजेदार तथ्य *****
@. विश्व का पहला सर्च इंजन आर्ची नाम से शुरू किया गया था।
@. 1971 पहला ई मेल रे टामलिन्सन द्वारा भेजा गया था, पर मजे की बात यह रही कि विश्व के पहले टेक्स्ट ई मेल भेजने वाले को यह भी याद नहीं है कि उस मैसेज में उन्होंने क्या लिखा था।
@. इंटरनेट के प्रारंभ से लेकर स्थापित होने तक इसे अनेकों मतभेदों का भी सामना करना पड़ा। वर्ष 1995 में रावर्ट मेडकॉल्फ नें इंटरनेट की हंसी उडा़ते हुए कहा था कि यह प्रयोग साल दो साल बाद धराशाई हो जाएगा और इसका कोई भी उपयोग नहीं होगा। अपनी बातों को वजन देते हुए उसने कहा था कि यदि मेरी कही बात गलत हुई और यह लंबे समय तक चलता रहा तो मैं अपने कहे शब्दों को पी जाऊंगा। बाद में जब इंटरनेट का व्यापक प्रसार हुआ और यह तेजी से लोगों तक पहुंचने लगा तो वर्ष 1997 में रावर्ट मेडकाल्फ ने, इंटरनेट की बढ़ती लोकप्रियता को देख ,अपने शब्दों को वापस लेने के लिए 1995 में अपनी दी गई स्पीच पेपर का प्रिंट निकाल कर उसे ग्राइंड कर पानी में घोलकर पी लिया था ।
@. टीम बर्नर्स ली ने 1997 में पहला वेब पेज (www) बनाया था।
@. वर्ष 2011 में फिजिसिस्ट रसेल सीज के अनुसार इंटरनेट इलेक्ट्रानों से निर्मित है और प्रवाहित हो रहे सम्पूर्ण इंटरनेट का वजन लगभग 50 ग्राम (एक स्ट्राबेरी के वजन) के आस पास बताया गया है

इच्छा मृत्यु ! सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त मंजूरी

नई दिल्ली ,10मार्च 2018।उच्चतम न्यायालय ने कल अपने ऐतिहासिक फैसले में इच्छामृत्यु की अनुमति देते हुए कहा कि ‘सम्मान से मरने का अधिकार’ मौलिक अधिकार है।इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त इजाजत दे दी। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाते हुए लोगों को जीवित रहते मौत की वसीयत लिखने की भी इजाजत दे दी। संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायाधीश ए के सिकरी, ए एम खानविल्कर, डा. डीवाई चन्द्रचूड़ व अशोक भूषण सम्मिलित रहे। न्यायालय में एक याचिका दाखिल कर मरणासन्न व्यक्ति द्वारा इच्छामृत्यु के लिए लिखी गई वसीयत (लिविंग विल) को मान्यता देने की मांग की गई थी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने गत 11 अक्तूबर को इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था जो शुक्रवार को सुनाया गया। न्यायालय ने कहा कि लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाना गलत नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि इसके दुरुपयोग से बचने के लिए नियम बनाए जाएं। न्यायालय ने अपने अहम फैसले में कहा कि असाध्य रोग से ग्रस्त व्यक्ति ने उपकरणों के सहारे उसे जीवित नहीं रखने के संबंध में यदि लिखित वसीयत दिया है, तो यह वैध होगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वसीयत का पालन कौन करेगा और इस प्रकार की इच्छामृत्यु के लिए मेडिकल बोर्ड किस प्रकार हामी भरेगा, इस संबंध में वह पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस संबंध में कानून बनने तक उसकी ओर से जारी दिशा-निर्देश और हिदायत प्रभावी रहेंगे। ‘लिविंग विल’ एक लिखित दस्तावेज होता है जिसमें कोई मरीज पहले से यह निर्देश देता है कि मरणासन्न स्थिति में पहुंचने या रजामंदी नहीं दे पाने की स्थिति में पहुंचने पर उसे किस तरह का इलाज दिया जाए। ज्ञातव्य है कि ‘पैसिव यूथेनेसिया’ य₹(इच्छामृत्यु) वह स्थिति है जब किसी मरणासन्न व्यक्ति को मौत के आगोश में पहुंचाने की मंशा से उसे इलाज देना बंद कर दिया जाता है।

शाबाश! सुरहा की ज्योति ने मध्य प्रदेश में लहराया परचम

गाजीपुर(उत्तर प्रदेश),5 मार्च 2018। सच्ची लगन, कठिन परिश्रम, विश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। यह कहना है जिले के सेवराई तहसील क्षेत्र के सुरहा गांव निवासी मध्यप्रदेश के सीहोर जिला के सिविल जज के पद पर आरुढ़ ज्योति चतुर्वेदी का। जिले के भदौरा क्षेत्र पंचायत के प्रथम ब्लाक प्रमुख रहे स्व.चतुर्भूज चौबे की सुपौत्री ज्योति चतुर्वेदी ने 27 वर्ष की उम्र में पीसीएस जे 2016 की परीक्षा उत्तीर्ण कर सीहोर जिले में सिविल जज बन अपने परिवार व क्षेत्र सहित जिले का नाम रोशन किया है। सिविल जज बनने के बाद रविवार चार मार्च को ज्योति चतुर्वेदी के पहली बार गांव पहुंचने पर ग्राम प्रधान प्रद्युम्न चौवे ने स्मृति चिन्ह देकर हौसलाअफजाई की तो ग्रामवासियों ने उनका स्वागत कर अभिभूत कर दिया।उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने दादा को देते हुए बताया कि दादाजी ने सदैव मेहनत के बल पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनके विश्वास का ही नतीजा है कि मैं अपने लक्ष्य तक पहुंच सकी।उन्होंने बताया कि भोपाल से 2005 में हाईस्कूल और 2007 में इंटरमीडिएट करने के उपरांत भोपाल के ला यूनिवर्सिटी से 2012 में एलएलबी और फिर 2014 में नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल से एलएलएम की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। उन्होंने दो साल कड़ी मेहनत के बाद अपने तीसरे प्रयास में 2016 की पीसीएस जे परीक्षा में कामयाबी पायी और फिर इन्होंने 30 दिसंबर 2017 को मध्य प्रदेश के सीहोर जिला के सिविल जज एवं मजिस्ट्रेट के पद पर पदभार ग्रहण कर लिया।ज्योति चतुर्वेदी का मानना है कि आज भी महिलाएं अपने अधिकार के प्रति पूरी तरह जागरूक नही हो पायी हैं जिसके चलते वे उचित स्थान नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने तथा महिला अपराधों पर अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की वकालत की ताकि महिलाएं भी आत्मविश्वास के साथ समाज में अपना यथोचित स्थान बनाकर समाज को दिशा दे सके।उनका कहना है कि यदि उन्हें उचित मौका मिला तो वे महिलाओं के हक व अधिकार के लिए कार्य करेंगी। उल्लेखनीय है कि ज्योति के पिता जगत मोहन चतुर्वेदी भोपाल के विशेष न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं।अपने तीन भाई बहनों में ज्योति चतुर्वेदी सबसे बड़ी है। इनसे छोटे भाई रंजन चतुर्वेदी इंजीनियरिंग की तो उनसे छोटे भाई रवि चतुर्वेदी एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रहे हैं।

जिले का होगा चहुंमुखी विकास- मनोज सिन्हा

रेल मार्ग के साथ जल मार्ग व वायु मार्ग भी होंगे संचालित – मनोज सिन्हा

गाजीपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यू इंडिया के सपने को साकार करने में गाजीपुर भी कंधे से कंधा मिलाकर जी जान से भागीदारी निभा रहा है। यह प्रयास है कि गाजीपुर सड़क व रेल मार्ग के साथ ही साथ जल मार्ग तथा वायु मार्ग मार्ग से भी पूरी तरह जुड़ जाए। उक्त वक्तव्य रेल राज्य व दूरसंचार मंत्री स्वतंत्र प्रभार मनोज सिन्हा ने रविवार को फतेहपुर अटवां हाल्ट स्टेशन के सुंदरीकरण का उद्घाटन करने के उपरांत व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय लोगों की समस्याओं को देखते हुए फतेहपुर अटवा हाल्ट स्टेशन पर तीन जोड़ी ट्रेनों के रुकने की व्यवस्था की गई है ताकि यहां के लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।विकास की चर्चा करते हुए उन्हो‍ने कहा कि कई रेेेल मार्गो पर दोहरीकरण का कार्य जारी है। शीघ्र ही इन रेल मार्गों पर इलेक्ट्रिक ट्रेन दौड़ेगी और शीघ्र ही ग्रामीण स्टेशनों पर भी वाई-फाई की सुविधा मिलनी आरम्भ हो जायेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2021 तक न्यू इंडिया बनाने के सपने को साकार करने के क्रम में गाजीपुर का विकास कर हम न्यू गाजीपुर बनायेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि गाजीपुर से हवाई सेवा भी संचालित हो,इसके लिए शीघ्र हवाई अड्डे का भी शिलान्यास होगा।जल मार्ग की चर्चा करते हुए कहा कि 178 करोड़ रुपये की लागत से जल्ला्पुर में छोटा बंदरगाह बन रहा है जिससे इस क्षेत्र की जनता को काफी सुविधाएं मिलेगी।फतेहपुर अटवां हाल्ट के उद्घाटन का सेहरा मनोज सिन्हा ने धनेश बिंद को बांधा ,कहा कि यह इन्ही की देन है कि इस स्टेशन पर दो डीएमयू व पैसेंजर ट्रेन हाल्ट करेगी। रेलवे महाप्रबंधक राजीव अग्रवाल द्वारा अतिथियों को स्मृति चिह्न व अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया।इस मौके पर सदर विधायक डा. संगीता बलवंत, मुहम्मदाबाद विधायक अलका राय, एमएलसी द्वय केदारनाथ सिंह व चेतनारायण सिंह, नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष विनोद अग्रवाल, कृष्णी बिहारी राय, रामनरेश कुशवाहा, रमेश सिंह पप्पू सहित काफी संख्या में क्षेत्रीय गणमान्यजन उपस्थित रहेे।। समारोह की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह ने किया।

दिशाओं के नाम

वाराणसी(उत्तर प्रदेश),3 मार्च 2018।हिन्दू धर्मानुसार दिशाएं 10 होती हैं जिनके क्रम हैैं – उर्ध्व, ईशान, पूर्व, आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम, वायव्य, उत्तर और अधो।उपरोक्त
प्रत्येक दिशा का एक देवता स्वामी होता है जिसे ‘दिग्पाल’ कहा गया है।ये दिग्पाल हैं- उर्ध्व के ब्रह्मा, ईशान के शिव व ईश, पूर्व के इंद्र, आग्नेय के अग्नि या वह्रि, दक्षिण के यम, नैऋत्य के नऋति, पश्चिम के वरुण, वायव्य के वायु और मारुत, उत्तर के कुबेर और अधो के अनंत।
1. उर्ध्व दिशा – उर्ध्व दिशा सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिशा है जिसके देवता ब्रह्मा हैं। आकाश ही ईश्वर है। जो व्यक्ति उर्ध्व मुख होकर प्रार्थना करते हैं उनकी प्रार्थना में असर होता है। वेदानुसार मांगना है तो ब्रह्म और ब्रह्मांड से मांगें, किसी और से नहीं। वह सब कुछ देने में सक्षम हैं।

वास्तु – घर की छत, छज्जे, उजालदान, खिड़की और बीच का स्थान इस दिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं। आकाश तत्व से हमारी आत्मा में शांति मिलती है। इस दिशा में पत्थर फेंकना, थूकना, पानी उछालना, चिल्लाना या उर्ध्व मुख करके अर्थात आकाश की ओर मुख करके गाली देना वर्जित है। इसका परिणाम घातक होता है।

@ 2. ईशान दिशा – पूर्व और उत्तर दिशाएं जहां पर मिलती हैं उस स्थान को ईशान दिशा कहते हैं। वास्तु अनुसार घर में इस स्थान को ईशान कोण कहते हैं। भगवान शिव का एक नाम ईशान भी है। चूंकि भगवान शिव का आधिपत्य उत्तर-पूर्व दिशा में होता है इसीलिए इस दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। इस दिशा के स्वामी ग्रह बृहस्पति और केतु माने गए हैं।

वास्तु अनुसार – घर, शहर और शरीर का यह हिस्सा सबसे पवित्र होता है इसलिए इसे साफ-स्वच्छ और खाली रखा जाना चाहिए। यहां जल की स्थापना की जाती है जैसे कुआं, बोरिंग, मटका या फिर पीने के पानी का स्थान। इसके अलावा इस स्थान को पूजा का स्थान भी बनाया जा सकता है। इस स्थान पर कूड़ा-करकट रखना, स्टोर, टॉयलेट, किचन वगैरह बनाना, लोहे का कोई भारी सामान रखना वर्जित है। इससे धन-संपत्ति का नाश और दुर्भाग्य का निर्माण होता है।

@@ 3. पूर्व दिशा – ईशान के बाद पूर्व दिशा का नंबर आता है। जब सूर्य उत्तरायण होता है तो वह ईशान से ही निकलता है, पूर्व से नहीं। इस दिशा के देवता इंद्र और स्वामी सूर्य हैं। पूर्व दिशा पितृस्थान का द्योतक है।

वास्तु – घर की पूर्व दिशा में कुछ खुला स्थान और ढाल होना चाहिए। शहर और घर का संपूर्ण पूर्वी क्षेत्र साफ और स्वच्छ होना चाहिए। घर में खिड़की, उजालदान या दरवाजा रख सकते हैं। इस दिशा में कोई रुकावट नहीं होना चाहिए। इस स्थान में घर के वरिष्ठजनों का कमरा या कोई भारी सामान या सीढ़ियां नहीं बनवानी चाहिए।
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4. आग्नेय दिशा – दक्षिण और पूर्व के मध्य की दिशा को आग्नेय दिशा कहते हैं। इसके अधिपति अग्निदेव हैैं और शुक्र इस दिशा के स्वामी हैं।

वास्तु – घर में यह दिशा रसोई या अग्नि संबंधी (इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों आदि) के रखने के लिए विशेष स्थान है। आग्नेय कोण का वास्तुसम्मत होना निवासियों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। आग्नेय कोण में शयन कक्ष या पढ़ाई का स्थान नहीं होना चाहिए। इस दिशा में घर का द्वार भी नहीं होना चाहिए। इससे गृहकलह और स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्याएं उत्पन्न होती हैैं।

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5. दक्षिण दिशा – दक्षिण दिशा के अधिपति द यमराज हैं । दक्षिण दिशा में वास्तु के अनुसार निर्माण करने से सुख, संपन्नता और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

वास्तु – वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा में मुख्‍य द्वार नहीं होना चाहिए। इस दिशा में घर का भारी सामान रखना चाहिए। इस दिशा में दरवाजा और खिड़की नहीं होना चाहिए। यह स्थान खाली भी नहीं रखा जाना चाहिए। इस दिशा में घर के भारी सामान रखें। शहर के दक्षिण भाग में आपका घर है तो वास्तु के उपाय करें।

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6. नैऋत्य दिशा – दक्षिण और पश्चिम दिशा के मध्य के स्थान को नैऋत्य कहा गया है। यह दिशा नैऋत देव के आधिपत्य में है। इस दिशा के स्वामी राहु और केतु हैं।

वास्तु – इस दिशा में पृथ्वी तत्व की प्रमुखता है इसलिए इस स्थान को ऊंचा और भारी रखना चाहिए। नैऋत्य दिशा में द्वार व गड्ढे, बोरिंग, कुएं इत्यादि नहीं होने चाहिए।

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7. पश्चिम दिशा – पश्चिम दिशा के देवता वरुण देव तथा स्वामी शनि देेव हैं।यह स्थान सिद्धि, भाग्य और ख्याति की प्रतीक है। इस दिशा में घर का मुख्‍य द्वार होना चाहिए।

वास्तु – यदि पश्‍चिम दिशा में मुख्य द्वार है तो द्वार को अच्छे से सजाकर रखें। द्वार के आसपास की दीवारों पर किसी भी प्रकार की दरारें न आने दें और इसका रंग गहरा रखें। घर के पश्चिम में बाथरूम, टॉयलेट, बेडरूम नहीं होना चाहिए। यह स्थान न ज्यादा खुला और न ज्यादा बंद रख सकते हैं।

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8. वायव्य दिशा – उत्तर और पश्चिम दिशा के मध्य में वायव्य दिशा का स्थान है। इस दिशा के देव वायुदेव हैं और इस दिशा में वायु तत्व की प्रधानता रहती है।

वास्तु : यह दिशा पड़ोसियों, मित्रों और संबंधियों से आपके रिश्तों पर प्रभाव डालती है। वास्तु ज्ञान के अनुसार इनसे अच्छे और सदुपयोगी संबंध बनाए जा सकते हैं। इस दिशा में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं होना चाहिए। इस दिशा के स्थान को हल्का बनाए रखें। खिड़की, दरवाजे, घंटी, जल, पेड़-पौधे से इस दिशा को सुंदर बनाएं।

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9. उत्तर दिशा – उत्तर दिशा के अधिपति धन

के देव कुबेर हैं । बुध ग्रह उत्तर दिशा के स्वामी हैं। उत्तर दिशा को मातृ स्थान भी कहा गया है।

वास्तु – उत्तर और ईशान दिशा में घर का मुख्‍य द्वार उत्तम होता है। इस दिशा में स्थान खाली रखना या कच्ची भूमि छोड़ना धन और समृद्धिकारक है। इस दिशा में शौचालय, रसोईघर रखने, कूड़ा-करकट डालने और इस दिशा को गंदा रखने से धन-संपत्ति का नाश होता है।

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10. अधो दिशा – अधो दिशा के देवता शेषनाग

हैं जिन्हें अनंत भी कहते हैं। घर के निर्माण के पूर्व धरती की वास्तु शांति की जाती है। अच्छी ऊर्जा वाली धरती का चयन किया जाना चाहिए। घर का तलघर, गुप्त रास्ते, कुआं, हौद आदि इस दिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
वास्तु – भूमि के भीतर की मिट्टी पीली हो तो अति उत्तम और भाग्यवर्धक होती है। आपके घर की भूमि साफ-स्वच्छ होना चाहिए। जो भूमि पूर्व दिशा और आग्नेय कोण में ऊंची तथा पश्चिम तथा वायव्य कोण में धंसी हुई हो, ऐसी भूमि पर निवास करने वालों के सभी कष्ट दूर होते रहते हैं।