पीजी कालेज मलिकपूरा के संस्थापक स्व भगवान सिंह जयन्ती पर कवियों ने काव्य पाठ द्वारा दी श्रद्धांजलि

गाजीपुर। अति पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र को शिक्षित व योग्य बनाने हेतु स्व. भगवान सिंह ने मलिकपुरा में विद्यालय और महाविद्यालय स्थापित कर विकास का एक पुनीत कार्य किया । इससे आज पूरा समाज लाभान्वित हो रहा है। सही अर्थों में वे क्षेत्र के मालवीय रहे। उक्त वक्तव्य सुरेंद्र सिंह पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश  ने पीजी कॉलेज मलिकपुरा के संस्थापक स्व. भगवान सिंह जयंती समारोह में मुख्य अतिथि पद से व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय सिंह ने समाज सेवा हेतु विद्यालय स्थापित किया था जब कि आज वर्तमान समय में विद्यालय खोलना एक व्यवसाय के रूप में चल पड़ा है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ स्व. भगवान सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण व मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण कर किया गया। महाविद्यालय परिवार के प्रबंधक रितेश कुमार सिंह तथा प्राचार्य ओम प्रकाश सिंह द्वारा अतिथियों को अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भाजपा नेता डॉक्टर मुकेश सिंह कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता स्थापित करने में स्वर्गीय सिंह ने कभी समझौता नहीं किया,योग्य और अनुभवी प्राध्यापकों के बल पर उन्होंने क्षेत्र को शिक्षित बनाया। आज इस बात की आवश्यकता है कि उच्च कोटिय शिक्षा देकर युवा वर्ग को आगे बढ़ाया जाए।  भगवान सिंह जयंती के अवसर पर उनकी स्मृति में आयोजित कवि सम्मेलन में आए कवियों ने अपने काव्य पाठ से लोगों की वाह वाही लूटी।कवि कुमार प्रवीण की रचना जिसमें युवा पुत्र की अपने माता पिता के प्रति मनोदशा का चित्रण कर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। भोजपुरी कवि अनंत देव पांडे ने ” गउओं अब गांव बुझाते नईखे , खपरा से घर छवाते नईखे, अब कतहीं उ बातें नइखे ” से गांव की गवईं संस्कृति के लोप होने का मार्मिक चित्रण किया। आकाशवाणी पटना से पधारे कवि डॉक्टर शंकर कैमूरी ने इंसानियत की मिसाल पर पढ़ा कि – आदमी को साहिबे किरदार होना चाहिए, आदमी को आदमी से प्यार होना चाहिए, सहित अपनी रचनाओं से लोगों में जोश भर दिया तो वही हास्य कविता के सशक्त हस्ताक्षर फजीहत गहमरी ने अपनी हास्य कविता से लोगों को हंसा हंसा कर लोटपोट कर दिया। मिर्जापुर से पधारी कवित्री पूनम श्रीवास्तव ने अपनी रचनाओं से समाज के साथ साथ देश के प्रति शहीदों का चित्रण कर देश प्रेम हेतु प्रेरित किया । कहा कि   ” जिंदगी दांव पर लगा दी तुमने अमन के लिए,  पी गए मौत का प्याला अहले वतन के लिए, आखिरी सांस तक तिरंगे की हिफाजत की, तिरंगा ओढ़ लिया अंत में कफन के लिए” । संचालक हरि नारायण सिंह हरिश ने पढ़ा कि  ” अब प्यार भी होने लगा व्यापार का हिस्सा, जब से हुआ है आदमी बाजार का हिस्सा, बेटे हैं, बेटी है ,मैं हूं ,पत्नी है पर मां नहीं रही अब परिवार का हिस्सा ” सुनाकर लोगों को मां के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया। कवित्री पूनम श्रीवास्तव ने प्यार के इजहार पर कहा ” बरसती आंख मेरी देख लो बादल की तरह, मिलोगे तो बांधकर रखूंगी आंचल की तरह, भले पूनम से रह लो दूर, पर सजा कर रखूंगी  आंखों में काजल की तरह। उक्त अवसर पर पूर्व प्राचार्य डॉक्टर पी एन सिंह, डॉक्टर श्री प्रकाश सिंह, श्रीकृष्ण सिंह, डॉ राजेंद्र सिंह, रामजन्म सिंह, डॉ डी एन सिंह, विजय शंकर चौबे ,डॉ हरि प्रसाद सिंह ,अनुराग सिंह सहित काफी संख्या में क्षेत्र गणमान्य जन व महाविद्यालय परिवार सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। अध्यक्षता चिरायु प्रसाद एडवोकेट तथा धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य ओमप्रकाश सिंह ने किया।

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